समाज क्या कहेगा !!!
समाज क्या कहेगा, लोग क्या कहेंगे।। यह हम सभी ने कई दफा अपने घरों में, या कहीं बाहर अनजान लोगो के बीच या उन चहरो के लिए सुना है जिनको ना हम जानते है और ना ही हमारी निजी ज़िंदगी में उनका कोई महत्व है। आज का युग या यू कहे नया व तकनीकी युग जिसमें हर चीज मुमकिन लगती है, आसान लगती हैं, फिर क्यों लोग इस समाज के डर से अपनी ज़िंदगी में ज़हर घोल रहे हैं, क्यों अपने मासूम बच्चो का भविष्य इन काटो रूपी सामाजिक सोच पर सजा रहे है। आज का युग तो बदलाव का युग माना जा रहा है, पर फिर भी नजाने क्यों लोग आज भी कुछ नया सोचने या करने से डरते है।
मुद्दे कई है लेकिन जो मुद्दा आज मै अपने ब्लॉग के माध्यम से उठाना चाह रहा हूं वह हैं, किशोरावस्था वह उससे जुड़ी कई कहीं अनकही बाते।। बालपन से किशोरावस्था तक का सफर सभी की ज़िंदगी का एक यादगार वह सुहावना सफर माना जाता हैं। यह ज़िन्दगी का वह पड़ाव है जिसमें छौटी सी भूल के कई भयानक परिणाम हो सकते है। यह बात सभी जान कर, समझ कर भी अनजान बनने का नाटक करते है और देर होने पर अपनों को ही कोसते है। सभी को यह समझना बहुत जरूरी है कि सही शिक्षा जीवन के हर पड़ाव पर मिलना उतना ही आवश्यक है जितना की सांस लेना चुकीं जीवन जीने के लिए सांस लेना जरूरी है और जीवन में आगे भड़ने और सहज जीवन के लिए सही शिक्षा।।
जिस शिक्षा की यहा बात की जा रही हैं, वह है बालपन से किशोरावस्था तक के सफर की शिक्षा, उस दौर से जुड़ी वह मूल शिक्षा जिसका मिलना बेहद जरूरी व आवश्यक है, परंतु यह मूल शिक्षा ना ही हमें स्कूल में सही प्रकार से दी जाती है और ना ही हमारे घरों में। लोग आज भी इस मुद्दे पर बात करने में संकोच करते है, शर्माते है, लेकिन वह ये नहीं समझते कि यह शिक्षा उनके जीवन की नींव हैं, वह बिना सही नींव के बड़ी से बड़ी इमारत भी डेह सकती है।।इसी मूल शिक्षा का महत्व में अपने ब्लॉग के माध्यम से साझा करने का पूर्णतय प्रयास करूंगा, ताकि लोग इसकी महत्वता को समझ सके और एक नए समाज का निर्माण कर सके और समाज में सही बदलाव ला सके।।

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